कुछ समाचार पत्रों के प्रतिनिधियों के आग्रह पर महाराष्ट्र, झारखंड विधानसभाओं के चुनाव और उत्तर प्रदेश विधान सभा के उपचुनाव परिणामों पर भारतीय
समाचार पत्रों के प्रतिनिधियों के आग्रह पर महाराष्ट्र, झारखंड विधानसभाओं के चुनाव और उत्तर प्रदेश विधान सभा के उपचुनाव परिणामों पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय सचिव डा. गिरीश ने निम्न प्रतिक्रिया प्रेस बयान के रूप में जारी की है।
हिन्दुत्व के पिच पर अनैतिक हथकंडे अपना कर जीत हासिल की भाजपा ने: डा. गिरीश
भाजपा की षडयंत्रकारी नीतियों को कम करके आंकने और गठबंधन धर्म न निभाना बना विपक्ष की हार का कारण बना
लखनऊ- 24 नवंबर 2024, महाराष्ट्र, झारखंड विधान सभा चुनावों एवं उतर प्रदेश विधान सभा के उपचुनावों के परिणामों पर प्रतिक्रिया जारी करते हुये भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय सचिव डा.गिरीश ने कहा कि भाजपा ने यह चुनाव सान्द्र हिन्दुत्व के पिच पर अनैतिक हथकंडे अपना कर लड़ा। महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में ये हथकंडे कारगर रहे जबकि आदिवासी बहुल राज्य की कुछ विशिष्ट स्थितियों में फिलहाल ये कारगर नहीं हो पाये।
भाजपा के शीर्षस्थ नेत्रत्व द्वारा समाज के ताने बाने को तहस करने वाले नारे और भाषण दिये गये जिससे ध्रुवीकरण गहरा हुआ। पहले से ही मतदाता सूचियों में अपने अनुकूल परिवर्तन कराये, पुलिस बल द्वारा विपक्ष से संबन्धित मतदाताओं को मतदान से रोका, चुनाव आयोग से आदेश जारी करा कर बुर्का नसींन एवं घूंघट वाली ‘लाड़ली बहिनाओं’ के मतदान न कर पाने की स्थिति पैदा की, बड़े पैमाने पर धन बांट कर वोट खरीदे और सत्ता के बल पर और भी अनेक हथकंडे अपनाये।
अपने को सांस्कृतिक संगठन बताने वाले संघ ने सारी मर्यादाएं ताक पर रख कर सांप्रदायिक अभियान चला कर ध्रुवीकरण को तीखा बनाया। कुछ उलेमाओं की कारगुजारियों, मुस्लिम नेताओं और विपक्षी नेताओं के बयानों को इस्तेमाल कर मीडिया ने ध्रुवीकरण को धार दी, ये भाजपा गठबंधन को जिताने के कारक बने। चुनाव से पूर्व सरकारी राजस्व से बांटी गयीं रेबड़ियाँ भी कैश फॉर वोट जैसी थीं और उन्होने असरदार काम किया। इस जीत को भाजपा की राजनीतिक कुशलता और लोकप्रियता बताना बेमानी है।
आदिवासी स्टेट झारखंड में सोरेन के जेल जाने से उपजी सहानुभूति और मणिपुर से लेकर देश के अन्य भागों में आदिवासियों को बरवाद और दोहन करने वाली भाजपा की नीतियाँ और झारखंड में आदिवासियों की राजनैतिक शक्ति को बांटने की कोशिश आदि ने भाजपा के वहाँ सत्ता हथियाने के मंसूबों को चकनाचूर कर दिया।
डा.गिरीश ने कहा कि यह संसद और विधानसभाओं में अधिक प्रतिनिधित्व रखने वाली विपक्षी पार्टियों की असपष्ट राजनीति, आमजनता की मूल समस्याओं से कटे रहने, नव उदारवाद की आर्थिक नीतियों को पकड़े रहने, मीडिया तक सीमित रहने, भाजपा की षडयंत्रकारी ताकत को कम करके आंकने, लोकसभा चुनावों में मिली बढ़त से अपने को अधिक आंकने, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी आदि भाजपा की विचारधारा का पर्दाफाश करने में सक्षम पार्टियों के महत्व को नकारने, गत चुनावों के परिणामों की समीक्षा न करने, उससे सबक न लेने जैसे कार्यव्यवहार की हार भी है।
उन्होने कहा “हमें अपनी भी समीक्षा करनी है” और ‘इंडिया’ गठबंधन में भी व्यापक समीक्षा के लिये स्थिति पैदा करनी होगी ताकि भारत जैसे महान देश की सत्ता पर कब्जा जमा चुकी और उसका इस्तेमाल कर दिन ब दिन ताकत बढ़ा रही सांप्रदायिक और फासीवादी ताकतों से देश को बचाया जा सके।
डा.गिरीश, राष्ट्रीय सचिव
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
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